एक बार धर्मपति, प्रजापति ब्रह्माजीने सारी जनताका कल्याण हो, अपने इस स्वार्थकी पूर्तिके लिये विधिपूर्वक यम-नियमोंको धारण किया॥ ३९॥✎ 176177178179
प्रजापतिर्धर्मपतिरेकदा नियमान् यमान्।
भद्रं प्रजानामन्विच्छन्नातिष्ठत् स्वार्थकाम्यया॥ ३९
एक बार धर्मपति, प्रजापति ब्रह्माजीने सारी जनताका कल्याण हो, अपने इस स्वार्थकी पूर्तिके लिये विधिपूर्वक यम-नियमोंको धारण किया॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 227) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/9/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)