श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.30

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

ज्ञानं परमगुह्यं मे यद् विज्ञानसमन्वितम्।

सरहस्यं तदङ्गं च गृहाण गदितं मया॥ ३०

jñānaṃ paramaguhyaṃ me yad vijñānasamanvitam|

sarahasyaṃ tadaṅgaṃ ca gṛhāṇa gaditaṃ mayā|| 30

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—अनुभव, प्रेमाभक्ति और साधनोंसे युक्त अत्यन्त गोपनीय अपने स्वरूपका ज्ञान मैं तुम्हें कहता हूँ; तुम उसे ग्रहण करो॥ ३०॥✎ 175

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #175 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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