ब्राह्मणश्रेष्ठ! कालकी सूक्ष्म गति त्रुटि आदि और स्थूल गति वर्ष आदि किस प्रकारसे जानी जाती है? विविध कर्मोंसे जीवोंकी कितनी और कैसी गतियाँ होती हैं॥ १३॥✎ 167168
कालस्यानुगतिर्या तु लक्ष्यतेऽण्वी बृहत्यपि।
यावत्यः कर्मगतयो यादृशीर्द्विजसत्तम॥ १३
ब्राह्मणश्रेष्ठ! कालकी सूक्ष्म गति त्रुटि आदि और स्थूल गति वर्ष आदि किस प्रकारसे जानी जाती है? विविध कर्मोंसे जीवोंकी कितनी और कैसी गतियाँ होती हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.8.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 220) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/8/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)