जिस प्रकार सबके आश्रय और सर्वस्वरूप भगवान् श्रीहरिमें लोगोंकी प्रेममयी भक्ति हो, ऐसा निश्चय करके इसका वर्णन करो॥ ५२॥✎ 161162163164
यथा हरौ भगवति नृणां भक्तिर्भविष्यति।
सर्वात्मन्यखिलाधारे इति सङ्कल्प्य वर्णय॥ ५२
जिस प्रकार सबके आश्रय और सर्वस्वरूप भगवान् श्रीहरिमें लोगोंकी प्रेममयी भक्ति हो, ऐसा निश्चय करके इसका वर्णन करो॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.7.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 218) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/7/52/