इस प्रकार विराट् पुरुषके अंगोंसे ही सारी सामग्रीका संग्रह करके मैंने उन्हीं सामग्रियोंसे उन यज्ञस्वरूप परमात्माका यज्ञके द्वारा यजन किया॥ २७॥✎ 141142
इति सम्भृतसम्भारः पुरुषावयवैरहम्।
तमेव पुरुषं यज्ञं तेनैवायजमीश्वरम्॥ २७
इस प्रकार विराट् पुरुषके अंगोंसे ही सारी सामग्रीका संग्रह करके मैंने उन्हीं सामग्रियोंसे उन यज्ञस्वरूप परमात्माका यज्ञके द्वारा यजन किया॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 206) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)