श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.27

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

इति सम्भृतसम्भारः पुरुषावयवैरहम्।

तमेव पुरुषं यज्ञं तेनैवायजमीश्‍वरम्॥ २७

iti sambhṛtasambhāraḥ puruṣāvayavairaham|

tameva puruṣaṃ yajñaṃ tenaivāyajamīśvaram|| 27

अर्थ

इस प्रकार विराट् पुरुषके अंगोंसे ही सारी सामग्रीका संग्रह करके मैंने उन्हीं सामग्रियोंसे उन यज्ञस्वरूप परमात्माका यज्ञके द्वारा यजन किया॥ २७॥✎ 141 142

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #141 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #142 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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