श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.22

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यदास्य नाभ्यान्‍नलिनादहमासं महात्मनः।

नाविदं यज्ञसम्भारान् पुरुषावयवादृते॥ २२

yadāsya nābhyānnalinādahamāsaṃ mahātmanaḥ|

nāvidaṃ yajñasambhārān puruṣāvayavādṛte|| 22

अर्थ

जिस समय इस विराट् पुरुषके नाभिकमलसे मेरा जन्म हुआ, उस समय इस पुरुषके अंगोंके अतिरिक्त मुझे और कोई भी यज्ञकी सामग्री नहीं मिली॥ २२॥✎ 141 142

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #141 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #142 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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