जिस समय इस विराट् पुरुषके नाभिकमलसे मेरा जन्म हुआ, उस समय इस पुरुषके अंगोंके अतिरिक्त मुझे और कोई भी यज्ञकी सामग्री नहीं मिली॥ २२॥✎ 141142
यदास्य नाभ्यान्नलिनादहमासं महात्मनः।
नाविदं यज्ञसम्भारान् पुरुषावयवादृते॥ २२
जिस समय इस विराट् पुरुषके नाभिकमलसे मेरा जन्म हुआ, उस समय इस पुरुषके अंगोंके अतिरिक्त मुझे और कोई भी यज्ञकी सामग्री नहीं मिली॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 205) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)