श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.24

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

सोऽहङ्कार इति प्रोक्तो विकुर्वन् समभूत्त्रिधा।

वैकारिकस्तैजसश्‍च तामसश्चेति यद्भिदा।

द्रव्यशक्तिः क्रियाशक्तिर्ज्ञानशक्तिरिति प्रभो॥ २४

so'haṅkāra iti prokto vikurvan samabhūttridhā|

vaikārikastaijasaśca tāmasaśceti yadbhidā|

dravyaśaktiḥ kriyāśaktirjñānaśaktiriti prabho|| 24

अर्थ

वह अहंकार कहलाया और विकारको प्राप्त होकर तीन प्रकारका हो गया। उसके भेद हैं—वैकारिक, तैजस और तामस। नारदजी! वे क्रमशः ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति और द्रव्यशक्तिप्रधान हैं॥ २४॥✎ 137 138

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #137 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #138 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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