वह अहंकार कहलाया और विकारको प्राप्त होकर तीन प्रकारका हो गया। उसके भेद हैं—वैकारिक, तैजस और तामस। नारदजी! वे क्रमशः ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति और द्रव्यशक्तिप्रधान हैं॥ २४॥✎ 137138
सोऽहङ्कार इति प्रोक्तो विकुर्वन् समभूत्त्रिधा।
वैकारिकस्तैजसश्च तामसश्चेति यद्भिदा।
द्रव्यशक्तिः क्रियाशक्तिर्ज्ञानशक्तिरिति प्रभो॥ २४
वह अहंकार कहलाया और विकारको प्राप्त होकर तीन प्रकारका हो गया। उसके भेद हैं—वैकारिक, तैजस और तामस। नारदजी! वे क्रमशः ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति और द्रव्यशक्तिप्रधान हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)