रजोगुण और सत्त्वगुणकी वृद्धि होनेपर महत्तत्त्वका जो विकार हुआ, उससे ज्ञान, क्रिया और द्रव्यरूप तमःप्रधान विकार हुआ॥ २३॥✎ 137138
महतस्तु विकुर्वाणाद्रजःसत्त्वोपबृंहितात्।
तमःप्रधानस्त्वभवद् द्रव्यज्ञानक्रियात्मकः॥ २३
रजोगुण और सत्त्वगुणकी वृद्धि होनेपर महत्तत्त्वका जो विकार हुआ, उससे ज्ञान, क्रिया और द्रव्यरूप तमःप्रधान विकार हुआ॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)