॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.1.10
तदहं तेऽभिधास्यामि महापौरुषिको भवान्।
यस्य श्रद्दधतामाशु स्यान्मुकुन्दे मतिः सती॥ १०
tadahaṃ te'bhidhāsyāmi mahāpauruṣiko bhavān|
yasya śraddadhatāmāśu syānmukunde matiḥ satī|| 10
अर्थ
तुम भगवान्के परमभक्त हो, इसलिये तुम्हें मैं इसे सुनाऊँगा। जो इसके प्रति श्रद्धा रखते हैं, उनकी शुद्ध चित्तवृत्ति भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंमें अनन्यप्रेमके साथ बहुत शीघ्र लग जाती है॥ १०॥