श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.34

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तमन्वथ वटो ब्रह्मन् सलिलं लोकसम्प्लवः।

तिरोधायि क्षणादस्य स्वाश्रमे पूर्ववत् स्थितः॥ ३४

tamanvatha vaṭo brahman salilaṃ lokasamplavaḥ|

tirodhāyi kṣaṇādasya svāśrame pūrvavat sthitaḥ|| 34

अर्थ

शौनकजी! उस शिशुके अन्तर्धान होते ही वह बरगदका वृक्ष तथा प्रलयकालीन दृश्य एवं जल भी तत्काल लीन हो गया और मार्कण्डेय मुनिने देखा कि मैं तो पहलेके समान ही अपने आश्रममें बैठा हुआ हूँ॥ ३४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे
मायादर्शनं नाम नवमोऽध्यायः॥ ९॥

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