सूतजीने कहा—शौनकजी! आपने बड़ा सुन्दर प्रश्न किया। इससे लोगोंका भ्रम मिट जायगा और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस कथामें भगवान् नारायणकी महिमा है। जो इसका गान करता है, उसके सारे कलिमल नष्ट हो जाते हैं॥ ६॥
प्रश्नस्त्वया महर्षेऽयं कृतो लोकभ्रमापहः।
नारायणकथा यत्र गीता कलिमलापहा॥ ६
सूतजीने कहा—शौनकजी! आपने बड़ा सुन्दर प्रश्न किया। इससे लोगोंका भ्रम मिट जायगा और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस कथामें भगवान् नारायणकी महिमा है। जो इसका गान करता है, उसके सारे कलिमल नष्ट हो जाते हैं॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 946) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/8/6/