श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.31

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

दृष्ट्वा निस्तेजसं कामं सगणं भगवान् स्वराट् ।

श्रुत्वानुभावं ब्रह्मर्षेर्विस्मयं समगात् परम्॥ ३१

dṛṣṭvā nistejasaṃ kāmaṃ sagaṇaṃ bhagavān svarāṭ |

śrutvānubhāvaṃ brahmarṣervismayaṃ samagāt param|| 31

अर्थ

जब देवराज इन्द्रने देखा कि कामदेव अपनी सेनाके साथ निस्तेज—हतप्रभ होकर लौटा है और सुना कि ब्रह्मर्षि मार्कण्डेयजी परम प्रभावशाली हैं, तब उन्हें बड़ा ही आश्‍चर्य हुआ॥ ३१॥

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