श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.18

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तदाश्रमपदं पुण्यं पुण्यद्रुमलतांचितम्।

पुण्यद्विजकुलाकीर्णं पुण्यामलजलाशयम्॥ १८

tadāśramapadaṃ puṇyaṃ puṇyadrumalatāṃcitam|

puṇyadvijakulākīrṇaṃ puṇyāmalajalāśayam|| 18

अर्थ

शौनकजी! मार्कण्डेयजीका आश्रम बड़ा ही पवित्र है। चारों ओर हरे-भरे पवित्र वृक्षोंकी पंक्तियाँ हैं, उनपर लताएँ लहलहाती रहती हैं। वृक्षोंके झुरमुटमें स्थान-स्थानपर पुण्यात्मा ऋषिगण निवास करते हैं और बड़े ही पवित्र एवं निर्मल जलसे भरे जलाशय सब ऋतुओंमें एक-से ही रहते हैं॥ १८॥

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