श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.11

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

एवं तपः स्वाध्यायपरो वर्षाणामयुतायुतम्।

आराधयन् हृषीकेशं जिग्ये मृत्युं सुदुर्जयम्॥ ११

evaṃ tapaḥ svādhyāyaparo varṣāṇāmayutāyutam|

ārādhayan hṛṣīkeśaṃ jigye mṛtyuṃ sudurjayam|| 11

अर्थ

मार्कण्डेयजीने इस प्रकार तपस्या और स्वाध्यायमें तत्पर रहकर करोड़ों वर्षोंतक भगवान्‌की आराधना की और इस प्रकार उस मृत्युपर भी विजय प्राप्त कर ली, जिसको जीतना बड़े-बड़े योगियोंके लिये भी कठिन है॥ ११॥

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