श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.16

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

राज्ञां ब्रह्मप्रसूतानां वंशस्त्रैकालिकोऽन्वयः।

वंशानुचरितं तेषां वृत्तं वंशधराश्‍च ये॥ १६

rājñāṃ brahmaprasūtānāṃ vaṃśastraikāliko'nvayaḥ|

vaṃśānucaritaṃ teṣāṃ vṛttaṃ vaṃśadharāśca ye|| 16

अर्थ

ब्रह्माजीसे जितने राजाओंकी सृष्टि हुई है, उनकी भूत, भविष्य और वर्तमानकालीन सन्तान-परम्पराको ‘वंश’ कहते हैं। उन राजाओंके तथा उनके वंशधरोंके चरित्रका नाम ‘वंशानुचरित’ है॥ १६॥

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