श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.80

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

कृतो हिरण्यनाभस्य चतुर्विंशतिसंहिताः।

शिष्य ऊचे स्वशिष्येभ्यः शेषा आवन्त्य आत्मवान्॥ ८०

kṛto hiraṇyanābhasya caturviṃśatisaṃhitāḥ|

śiṣya ūce svaśiṣyebhyaḥ śeṣā āvantya ātmavān|| 80

अर्थ

हिरण्यनाभका शिष्य था—कृत। उसने अपने शिष्योंको चौबीस संहिताएँ पढ़ायीं। शेष संहिताएँ परम संयमी आवन्त्यने अपने शिष्योंको दीं। इस प्रकार सामवेदका विस्तार हुआ॥ ८०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे
वेदशाखाप्रणयनं नाम षष्ठोऽध्यायः॥ ६॥

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