यह बात मैं पहले ही कह चूका हूँ कि महर्षि श्रीकृष्ण-द्वैपायनने जैमिनिमुनिको सामसंहिताका अध्ययन कराया। उनके पुत्र थे सुमन्तुमुनि और पौत्र थे सुन्वान्। जैमिनिमुनिने अपने पुत्र और पौत्रको एक-एक संहिता पढ़ायी॥ ७५॥
जैमिनेः सामगस्यासीत् सुमन्तुस्तनयो मुनिः।
सुन्वांस्तु तत्सुतस्ताभ्यामेकैकां प्राह संहिताम्॥ ७५
यह बात मैं पहले ही कह चूका हूँ कि महर्षि श्रीकृष्ण-द्वैपायनने जैमिनिमुनिको सामसंहिताका अध्ययन कराया। उनके पुत्र थे सुमन्तुमुनि और पौत्र थे सुन्वान्। जैमिनिमुनिने अपने पुत्र और पौत्रको एक-एक संहिता पढ़ायी॥ ७५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.75 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 942) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/75/