श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.75

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

जैमिनेः सामगस्यासीत् सुमन्तुस्तनयो मुनिः।

सुन्वांस्तु तत्सुतस्ताभ्यामेकैकां प्राह संहिताम्॥ ७५

jaimineḥ sāmagasyāsīt sumantustanayo muniḥ|

sunvāṃstu tatsutastābhyāmekaikāṃ prāha saṃhitām|| 75

अर्थ

यह बात मैं पहले ही कह चूका हूँ कि महर्षि श्रीकृष्ण-द्वैपायनने जैमिनिमुनिको सामसंहिताका अध्ययन कराया। उनके पुत्र थे सुमन्तुमुनि और पौत्र थे सुन्वान्। जैमिनिमुनिने अपने पुत्र और पौत्रको एक-एक संहिता पढ़ायी॥ ७५॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें