श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.66

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

याज्ञवल्क्यस्ततो ब्रह्मन् छन्दांस्यधिगवेषयन्।

गुरोरविद्यमानानि सूपतस्थेऽर्कमीश्‍वरम्॥ ६६

yājñavalkyastato brahman chandāṃsyadhigaveṣayan|

guroravidyamānāni sūpatasthe'rkamīśvaram|| 66

अर्थ

शौनकजी! अब याज्ञवल्क्यने सोचा कि मैं ऐसी श्रुतियाँ प्राप्त करूँ, जो मेरे गुरुजीके पास भी न हों। इसके लिये वे सूर्यभगवान्‌का उपस्थान करने लगे॥ ६६॥

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