उन्होंने ‘बह्वृच’ नामकी पहली ऋक्संहिता पैलको, ‘निगद’ नामकी दूसरी यजुःसंहिता वैशम्पायनको, सामश्रुतियोंकी ‘छन्दोग-संहिता’ जैमिनिको और अपने शिष्य सुमन्तुको ‘अथर्वांगिरससंहिता’ का अध्ययन कराया॥ ५२-५३॥
यह अर्थ श्लोक 52–53 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
साम्नां जैमिनये प्राह तथा छन्दोगसंहिताम्।
अथर्वांगिरसीं नाम स्वशिष्याय सुमन्तवे॥ ५३
उन्होंने ‘बह्वृच’ नामकी पहली ऋक्संहिता पैलको, ‘निगद’ नामकी दूसरी यजुःसंहिता वैशम्पायनको, सामश्रुतियोंकी ‘छन्दोग-संहिता’ जैमिनिको और अपने शिष्य सुमन्तुको ‘अथर्वांगिरससंहिता’ का अध्ययन कराया॥ ५२-५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 939) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/53/