श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.48

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अस्मिन्‍नप्यन्तरे ब्रह्मन् भगवाँल्लोकभावनः।

ब्रह्मेशाद्यैर्लोकपालैर्याचितो धर्मगुप्तये॥ ४८

asminnapyantare brahman bhagavām̐llokabhāvanaḥ|

brahmeśādyairlokapālairyācito dharmaguptaye|| 48

अर्थ

शौनकजी! इस वैवस्वत मन्वन्तरमें भी ब्रह्मा-शंकर आदि लोकपालोंकी प्रार्थनासे अखिल विश्‍वके जीवनदाता भगवान्‌ने धर्मकी रक्षाके लिये महर्षि पराशरद्वारा सत्यवतीके गर्भसे अपने अंशांश-कलास्वरूप व्यासके रूपमें अवतार ग्रहण किया है। परम भाग्यवान् शौनकजी! उन्होंने ही वर्तमान युगमें वेदके चार विभाग किये हैं॥ ४८-४९॥

यह अर्थ श्लोक 48–49 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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