श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.15

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

देवदुन्दुभयो नेदुर्गन्धर्वाप्सरसो जगुः।

ववृषुः पुष्पवर्षाणि विबुधाः साधुवादिनः॥ १५

devadundubhayo nedurgandharvāpsaraso jaguḥ|

vavṛṣuḥ puṣpavarṣāṇi vibudhāḥ sādhuvādinaḥ|| 15

अर्थ

देवताओंकी दुन्दुभियाँ अपने-आप बज उठीं। गन्धर्व और अप्सराएँ गान करने लगीं। देवतालोग ‘साधु-साधु’ के नारे लगाकर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ १५॥

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