श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.5.13

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

एतत्ते कथितं तात यथाऽऽत्मा पृष्टवान् नृप।

हरेर्विश्‍वात्मनश्‍चेष्टां किं भूयः श्रोतुमिच्छसि॥ १३

harerviśvātmanaśceṣṭāṃ kiṃ bhūyaḥ śrotumicchasi|| 13

अर्थ

आत्मस्वरूप बेटा परीक्षित्! तुमने विश्‍वात्मा भगवान्‌की लीलाके सम्बन्धमें जो प्रश्‍न किया था, उसका उत्तर मैंने दे दिया, अब और क्या सुनना चाहते हो?॥ १३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे
ब्रह्मोपदेशो नाम पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥

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