श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.4.36

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कालस्रोतोजवेनाशु ह्रियमाणस्य नित्यदा।

परिणामिनामवस्थास्ता जन्मप्रलयहेतवः॥ ३६

kālasrotojavenāśu hriyamāṇasya nityadā|

pariṇāmināmavasthāstā janmapralayahetavaḥ|| 36

अर्थ

संसारके परिणामी पदार्थ नदी-प्रवाह और दीप-शिखा आदि क्षण-क्षण बदलते रहते हैं। उनकी बदलती हुई अवस्थाओंको देखकर यह निश्‍चय होता है कि देह आदि भी कालरूप सोतेके वेगमें बहते-बदलते जा रहे हैं। इसलिये क्षण-क्षणमें उनकी उत्पत्ति और प्रलय हो रहा है॥ ३६॥

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