श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यां विसृज्यैव मनवस्तत्सुताश्‍च कुरूद्वह।

गता यथागतं युद्धे तां मां जेष्यन्त्यबुद्धयः॥ ६

yāṃ visṛjyaiva manavastatsutāśca kurūdvaha|

gatā yathāgataṃ yuddhe tāṃ māṃ jeṣyantyabuddhayaḥ|| 6

अर्थ

परीक्षित्! पृथ्वी कहती है कि ‘बड़े-बड़े मनु और उनके वीर पुत्र मुझे ज्यों-की-त्यों छोड़कर जहाँसे आये थे, वहीं खाली हाथ लौट गये, मुझे अपने साथ न ले जा सके। अब ये मूर्ख राजा मुझे युद्धमें जीतकर वशमें करना चाहते हैं॥ ६॥

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