श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.49

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्मात् सर्वात्मना राजन् हृदिस्थं कुरु केशवम्।

म्रियमाणो ह्यवहितस्ततो यासि परां गतिम्॥ ४९

tasmāt sarvātmanā rājan hṛdisthaṃ kuru keśavam|

mriyamāṇo hyavahitastato yāsi parāṃ gatim|| 49

अर्थ

परीक्षित्! अब तुम्हारी मृत्युका समय निकट आ गया है। अब सावधान हो जाओ। पूरी शक्तिसे और अन्तःकरणकी सारी वृत्तियोंसे भगवान् श्रीकृष्णको अपने हृदयसिंहासनपर बैठा लो। ऐसा करनेसे अवश्य ही तुम्हें परमगतिकी प्राप्ति होगी॥ ४९॥

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