॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.25
तस्मिँल्लुब्धा दुराचारा निर्दयाः शुष्कवैरिणः।
दुर्भगा भूरितर्षाश्च शूद्रदाशोत्तराः प्रजाः॥ २५
tasmim̐llubdhā durācārā nirdayāḥ śuṣkavairiṇaḥ|
durbhagā bhūritarṣāśca śūdradāśottarāḥ prajāḥ|| 25
अर्थ
कलियुगमें लोग लोभी, दुराचारी और कठोरहृदय होते हैं। वे झूठमूठ एक-दूसरेसे वैर मोल ले लेते हैं, एवं लालसा-तृष्णाकी तरंगोंमें बहते रहते हैं। उस समयके अभागे लोगोंमें शूद्र, केवट आदिकी ही प्रधानता रहती है॥ २५॥