श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.23

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यशस्विनो महाशालाः स्वाध्यायाध्ययने रताः।

आढ्याः कुटुम्बिनो हृष्टा वर्णाः क्षत्रद्विजोत्तराः४॥ २३

yaśasvino mahāśālāḥ svādhyāyādhyayane ratāḥ|

āḍhyāḥ kuṭumbino hṛṣṭā varṇāḥ kṣatradvijottarāḥ|| 23

अर्थ

उस समयके लोग बड़े यशस्वी, कर्मकाण्डी और वेदोंके अध्ययन-अध्यापनमें बड़े तत्पर होते हैं। लोगोंके कुटुम्ब बड़े-बड़े होते हैं, प्रायः लोग धनाढ्य एवं सुखी होते हैं। उस समय वर्णोंमें क्षत्रिय और ब्राह्मण दो वर्णोंकी प्रधानता रहती है॥ २३॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    त्तमाः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 919)

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