श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

त्रेतायां धर्मपादानां तुर्यांशो हीयते शनैः।

अधर्मपादैरनृतहिंसासन्तोषविग्रहैः ॥ २०

tretāyāṃ dharmapādānāṃ turyāṃśo hīyate śanaiḥ|

adharmapādairanṛtahiṃsāsantoṣavigrahaiḥ || 20

अर्थ

परीक्षित्! धर्मके समान अधर्मके भी चार चरण हैं—असत्य, हिंसा, असन्तोष और कलह। त्रेतायुगमें इनके प्रभावसे धीरे-धीरे धर्मके सत्य आदि चरणोंका चतुर्थांश क्षीण हो जाता है॥ २०॥

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