भीष्मपितामहके पिता राजा शन्तनुके भाई देवापि और इक्ष्वाकुवंशी मरु इस समय कलाप-ग्राममें स्थित हैं। वे बहुत बड़े योगबलसे युक्त हैं॥ ३७॥
देवापिः शन्तनोर्भ्राता मरुश्चेक्ष्वाकुवंशजः।
कलापग्राम आसाते महायोगबलान्वितौ॥ ३७
भीष्मपितामहके पिता राजा शन्तनुके भाई देवापि और इक्ष्वाकुवंशी मरु इस समय कलाप-ग्राममें स्थित हैं। वे बहुत बड़े योगबलसे युक्त हैं॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.2.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 915) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/2/37/