tāvat kalirvai pṛthivīṃ parākrāntuṃ na cāśakat|| 30
अर्थ
जबतक लक्ष्मीपति भगवान् श्रीकृष्ण अपने चरणकमलोंसे पृथ्वीका स्पर्श करते रहे, तबतक कलियुग पृथ्वीपर अपना पैर न जमा सका॥ ३०॥✎ 1924
यावत् स पादपद्माभ्यां स्पृशन्नास्ते रमापतिः।
तावत् कलिर्वै पृथिवीं पराक्रान्तुं न चाशकत्॥ ३०
जबतक लक्ष्मीपति भगवान् श्रीकृष्ण अपने चरणकमलोंसे पृथ्वीका स्पर्श करते रहे, तबतक कलियुग पृथ्वीपर अपना पैर न जमा सका॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.2.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 915) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/2/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1924 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): परम-धामको → परमधामको