श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.13

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

पाखण्डप्रचुरे धर्मे दस्युप्रायेषु राजसु।

चौर्यानृतवृथाहिंसानानावृत्तिषु वै नृषु॥ १३

pākhaṇḍapracure dharme dasyuprāyeṣu rājasu|

cauryānṛtavṛthāhiṃsānānāvṛttiṣu vai nṛṣu|| 13

अर्थ

धर्ममें पाखण्डकी प्रधानता हो जायगी। राजे-महाराजे डाकू-लुटेरोंके समान हो जायँगे। मनुष्य चोरी, झूठ तथा निरपराध हिंसा आदि नाना प्रकारके कुकर्मोंसे जीविका चलाने लगेंगे॥ १३॥

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