॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.2.1
अथ द्वितीयोऽध्यायः
कलियुगके धर्म
श्रीशुक उवाच
ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया।
कालेन बलिना राजन् नङ्क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः॥ १
tataścānudinaṃ dharmaḥ satyaṃ śaucaṃ kṣamā dayā|
kālena balinā rājan naṅkṣyatyāyurbalaṃ smṛtiḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! समय बड़ा बलवान् है; ज्यों-ज्यों घोर कलियुग आता जायगा, त्यों-त्यों उत्तरोत्तर धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरणशक्तिका लोप होता जायगा॥ १॥