tathā kuruṣva deveśa nāthastvaṃ no yataḥ prabho|| 22
अर्थ
देवताओंके आराध्यदेव सर्वेश्वर! आप ही हमारे एकमात्र स्वामी एवं सर्वस्व हैं। अब आप ऐसी कृपा कीजिये कि बार-बार जन्म ग्रहण करते रहनेपर भी आपके चरणकमलोंमें हमारी अविचल भक्ति बनी रहे॥ २२॥
भवे भवे यथा भक्तिः पादयोस्तव जायते।
तथा कुरुष्व देवेश नाथस्त्वं नो यतः प्रभो॥ २२
देवताओंके आराध्यदेव सर्वेश्वर! आप ही हमारे एकमात्र स्वामी एवं सर्वस्व हैं। अब आप ऐसी कृपा कीजिये कि बार-बार जन्म ग्रहण करते रहनेपर भी आपके चरणकमलोंमें हमारी अविचल भक्ति बनी रहे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 982) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/22/