॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.12.25
रामस्य भार्गवेन्द्रस्य निःक्षत्रकरणं भुवः।
ऐलस्य सोमवंशस्य ययातेर्नहुषस्य च॥ २५
rāmasya bhārgavendrasya niḥkṣatrakaraṇaṃ bhuvaḥ|
ailasya somavaṃśasya yayāternahuṣasya ca|| 25
अर्थ
भृगुवंशशिरोमणि परशुरामजीका क्षत्रियसंहार, चन्द्रवंशी नरपति पुरूरवा, ययाति, नहुष, दुष्यन्त-नन्दन भरत, शन्तनु और उनके पुत्र भीष्म आदिकी संक्षिप्त कथाएँ भी नवम स्कन्धमें ही हैं। सबके अन्तमें ययातिके बड़े लड़के यदुका वंशविस्तार कहा गया है॥ २५-२६॥