॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.11.44
विष्णुरश्वतरो रम्भा सूर्यवर्चाश्च सत्यजित्।
विश्वामित्रो मखापेत ऊर्जमासं नयन्त्यमी॥ ४४
viṣṇuraśvataro rambhā sūryavarcāśca satyajit|
viśvāmitro makhāpeta ūrjamāsaṃ nayantyamī|| 44
अर्थ
तथा कार्तिकमें विष्णु नामक सूर्यके साथ अश्वतर नाग, रम्भा अप्सरा, सूर्यवर्चा गन्धर्व, सत्यजित् यक्ष, विश्वामित्र ऋषि और मखापेत राक्षस अपना-अपना कार्य सम्पन्न करते हैं॥ ४४॥