श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.28

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तेषां नामानि कर्माणि संयुक्तानामधीश्‍वरैः।

ब्रूहि नः श्रद्दधानानां व्यूहं सूर्यात्मनो हरेः॥ २८

teṣāṃ nāmāni karmāṇi saṃyuktānāmadhīśvaraiḥ|

brūhi naḥ śraddadhānānāṃ vyūhaṃ sūryātmano hareḥ|| 28

अर्थ

शौनकजीने कहा—सूतजी! भगवान् श्रीशुकदेवजीने श्रीमद्भागवत-कथा सुनाते समय राजर्षि परीक्षित‍्से (पंचम स्कन्धमें) कहा था कि ऋषि, गन्धर्व, नाग, अप्सरा, यक्ष, राक्षस और देवताओंका एक सौरगण होता है और ये सातों प्रत्येक महीनेमें बदलते रहते हैं। ये बारह गण अपने स्वामी द्वादश आदित्योंके साथ रहकर क्या काम करते हैं और उनके अन्तर्गत व्यक्तियोंके नाम क्या हैं? सूर्यके रूपमें भी स्वयं भगवान् ही हैं; इसलिये उनके विभागको हम बड़ी श्रद्धाके साथ सुनना चाहते हैं, आप कृपा करके कहिये॥ २७-२८॥

यह अर्थ श्लोक 27–28 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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