श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ब्राह्मणाः साधवः शान्ता निःसंगा भूतवत्सलाः।

एकान्तभक्ता अस्मासु निर्वैराः समदर्शिनः॥ २०

brāhmaṇāḥ sādhavaḥ śāntā niḥsaṃgā bhūtavatsalāḥ|

ekāntabhaktā asmāsu nirvairāḥ samadarśinaḥ|| 20

अर्थ

ब्राह्मण स्वभावसे ही परोपकारी, शान्तचित्त एवं अनासक्त होते हैं। वे किसीके साथ वैरभाव नहीं रखते और समदर्शी होनेपर भी प्राणियोंका कष्ट देखकर उसके निवारणके लिये पूरे हृदयसे जुट जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता तो यह होती है कि वे हमारे अनन्य प्रेमी एवं भक्त होते हैं॥ २०॥

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