॥ श्रीहरिः ॥
विधिसारः सुतस्तस्याजातशत्रुर्भविष्यति।
दर्भकस्तत्सुतो भावी दर्भकस्याजयः स्मृतः॥ ६
vidhisāraḥ sutastasyājātaśatrurbhaviṣyati|
darbhakastatsuto bhāvī darbhakasyājayaḥ smṛtaḥ|| 6
अर्थ
क्षेत्रज्ञका विधिसार, उसका अजातशत्रु, फिर दर्भक और दर्भकका पुत्र अजय होगा॥ ६॥
विधिसारः सुतस्तस्याजातशत्रुर्भविष्यति।
दर्भकस्तत्सुतो भावी दर्भकस्याजयः स्मृतः॥ ६
क्षेत्रज्ञका विधिसार, उसका अजातशत्रु, फिर दर्भक और दर्भकका पुत्र अजय होगा॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.1.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 907) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/1/6/