श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.42

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

असंस्कृताः क्रियाहीना रजसा तमसाऽऽवृताः।

प्रजास्ते भक्षयिष्यन्ति म्लेच्छा राजन्यरूपिणः॥ ४२

asaṃskṛtāḥ kriyāhīnā rajasā tamasā''vṛtāḥ|

prajāste bhakṣayiṣyanti mlecchā rājanyarūpiṇaḥ|| 42

अर्थ

इनमें परम्परागत संस्कार नहीं होंगे। ये अपने कर्तव्य-कर्मका पालन नहीं करेंगे। रजोगुण और तमोगुणसे अंधे बने रहेंगे। राजाके वेषमें वे म्लेच्छ ही होंगे। वे लूट-खसोटकर अपनी प्रजाका खून चूसेंगे॥ ४२॥

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