श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.40

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तुल्यकाला इमे राजन् म्लेच्छप्रायाश्‍च भूभृतः।

एतेऽधर्मानृतपराः फल्गुदास्तीव्रमन्यवः॥ ४०

tulyakālā ime rājan mlecchaprāyāśca bhūbhṛtaḥ|

ete'dharmānṛtaparāḥ phalgudāstīvramanyavaḥ|| 40

अर्थ

परीक्षित्! ये सब-के-सब राजा आचार-विचारमें म्लेच्छप्राय होंगे। ये सब एक ही समय भिन्‍न-भिन्‍न प्रान्तोंमें राज्य करेंगे। ये सब-के-सब परले सिरेके झूठे, अधार्मिक और स्वल्प दान करनेवाले होंगे। छोटी-छोटी बातोंको लेकर ही ये क्रोधके मारे आगबबूला हो जाया करेंगे॥ ४०॥

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