श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.30

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ततोऽष्टौ यवना भाव्याश्‍चतुर्दश तुरुष्ककाः।

भूयो दश गुरुण्डाश्‍च मौना एकादशैव तु॥ ३०

tato'ṣṭau yavanā bhāvyāścaturdaśa turuṣkakāḥ|

bhūyo daśa guruṇḍāśca maunā ekādaśaiva tu|| 30

अर्थ

इनके बाद आठ यवन और चौदह तुर्क राज्य करेंगे। इसके बाद दस गुरुण्ड और ग्यारह मौन नरपति होंगे॥ ३०॥

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