yo vimugdho jaḍo bālo yo guṇebhyaḥ paraṃ gataḥ|| 4
अर्थ
इस जगत्में दो ही प्रकारके व्यक्ति निश्चिन्त और परमानन्दमें मग्न रहते हैं—एक तो भोलाभाला निश्चेष्ट नन्हा-सा बालक और दूसरा वह पुरुष जो गुणातीत हो गया हो॥ ४॥
द्वावेव चिन्तया मुक्तौ परमानन्द आप्लुतौ।
यो विमुग्धो जडो बालो यो गुणेभ्यः परं गतः॥ ४
इस जगत्में दो ही प्रकारके व्यक्ति निश्चिन्त और परमानन्दमें मग्न रहते हैं—एक तो भोलाभाला निश्चेष्ट नन्हा-सा बालक और दूसरा वह पुरुष जो गुणातीत हो गया हो॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.9.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 770) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/9/4/