भगवान्की अचिन्त्य शक्तिसे समय आनेपर वे अंडे फूट गये और उनमेंसे हाथ-पैरवाले बच्चे निकल आये। उनका एक-एक अंग और रोएँ अत्यन्त कोमल थे॥ ५८॥✎ 1820
तेषु काले व्यजायन्त रचितावयवा हरेः।
शक्तिभिर्दुर्विभाव्याभिः कोमलांगतनूरुहाः॥ ५८
भगवान्की अचिन्त्य शक्तिसे समय आनेपर वे अंडे फूट गये और उनमेंसे हाथ-पैरवाले बच्चे निकल आये। उनका एक-एक अंग और रोएँ अत्यन्त कोमल थे॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.7.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 760) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/7/58/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1820 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): बच्चे → हाथ-पैरवाले बच्चे