॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.7.34
मधुहा हरिणो मीनः पिंगला कुररोऽर्भकः।
कुमारी शरकृत् सर्प ऊर्णनाभिः सुपेशकृत्॥ ३४
madhuhā hariṇo mīnaḥ piṃgalā kuraro'rbhakaḥ|
kumārī śarakṛt sarpa ūrṇanābhiḥ supeśakṛt|| 34
अर्थ
मेरे गुरुओंके नाम हैं—पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंग, भौंरा या मधुमक्खी, हाथी, शहद निकालनेवाला, हरिन, मछली, पिंगला वेश्या, कुरर पक्षी, बालक, कुँआरी कन्या, बाण बनानेवाला, सर्प, मकड़ी और भृंगी कीट॥ ३३-३४॥