श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.32

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ब्राह्मण उवाच

सन्ति मे गुरवो राजन् बहवो बुद्ध्युपाश्रिताः।

यतो बुद्धिमुपादाय मुक्तोऽटामीह ताञ्छृणु॥ ३२

santi me guravo rājan bahavo buddhyupāśritāḥ|

yato buddhimupādāya mukto'ṭāmīha tāñchṛṇu|| 32

अर्थ

ब्रह्मवेत्ता दत्तात्रेयजीने कहा—राजन्! मैंने अपनी बुद्धिसे बहुत-से गुरुओंका आश्रय लिया है, उनसे शिक्षा ग्रहण करके मैं इस जगत‍्में मुक्तभावसे स्वच्छन्द विचरता हूँ। तुम उन गुरुओंके नाम और उनसे ग्रहण की हुई शिक्षा सुनो॥ ३२॥

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