समुद्रः सप्तमेऽह्न्येतां पुरीं च प्लावयिष्यति॥ ३✎ 2144
kulaṃ vai śāpanirdagdhaṃ naṃkṣyatyanyonyavigrahāt|
samudraḥ saptame'hnyetāṃ purīṃ ca plāvayiṣyati|| 3
अर्थ
अब यह यदुवंश, जो ब्राह्मणोंके शापसे भस्म हो चुका है, पारस्परिक फूट और युद्धसे नष्ट हो जायगा। आजके सातवें दिन समुद्र इस पुरी—द्वारकाको डुबो देगा॥ ३॥
कुलं वै शापनिर्दग्धं नंक्ष्यत्यन्योन्यविग्रहात्।
समुद्रः सप्तमेऽह्न्येतां पुरीं च प्लावयिष्यति॥ ३
अब यह यदुवंश, जो ब्राह्मणोंके शापसे भस्म हो चुका है, पारस्परिक फूट और युद्धसे नष्ट हो जायगा। आजके सातवें दिन समुद्र इस पुरी—द्वारकाको डुबो देगा॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.7.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 752) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/7/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)