॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.7.22
एकद्वित्रिचतुष्पादो बहुपादस्तथापदः।
बह्व्यः सन्ति पुरः सृष्टास्तासां मे पौरुषी प्रिया॥ २२✎ 2145
ekadvitricatuṣpādo bahupādastathāpadaḥ|
bahvyaḥ santi puraḥ sṛṣṭāstāsāṃ me pauruṣī priyā|| 22
अर्थ
मैंने एक पैरवाले, दो पैरवाले, तीन पैरवाले, चार पैरवाले, चारसे अधिक पैरवाले और बिना पैरके—इत्यादि अनेक प्रकारके शरीरोंका निर्माण किया है। उनमें मुझे सबसे अधिक प्रिय मनुष्यका ही शरीर है॥ २२॥