श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

प्रायेण मनुजा लोके लोकतत्त्वविचक्षणाः।

समुद्धरन्ति ह्यात्मानमात्मनैवाशुभाशयात्॥ १९

prāyeṇa manujā loke lokatattvavicakṣaṇāḥ|

samuddharanti hyātmānamātmanaivāśubhāśayāt|| 19

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धव! संसारमें जो मनुष्य ‘यह जगत् क्या है? इसमें क्या हो रहा है?’ इत्यादि बातोंका विचार करनेमें निपुण हैं, वे चित्तमें भरी हुई अशुभ वासनाओंसे अपने-आपको स्वयं अपनी विवेक-शक्तिसे ही प्रायः बचा लेते हैं॥ १९॥

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