श्रीशुकदेवजी कहते हैं—कुलनन्दन! जब भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार आज्ञा दी, तब यदुवंशियोंने एक मतसे प्रभास जानेका निश्चय कर लिया और सब अपने-अपने रथ सजाने-जोतने लगे॥ ३९॥
एवं भगवताऽऽदिष्टा यादवाः कुलनन्दन।
गन्तुं कृतधियस्तीर्थं स्यन्दनान् समयूयुजन्॥ ३९
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—कुलनन्दन! जब भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार आज्ञा दी, तब यदुवंशियोंने एक मतसे प्रभास जानेका निश्चय कर लिया और सब अपने-अपने रथ सजाने-जोतने लगे॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.6.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 750) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/6/39/