सर्वाधार! अब हमलोगोंका ऐसा कोई काम बाकी नहीं है, जिसे पूर्ण करनेके लिये आपके यहाँ रहनेकी आवश्यकता हो। ब्राह्मणोंके शापके कारण आपका यह कुल भी एक प्रकारसे नष्ट हो ही चुका है॥ २६॥
नाधुना तेऽखिलाधार देवकार्यावशेषितम्।
कुलं च विप्रशापेन नष्टप्रायमभूदिदम्॥ २६
सर्वाधार! अब हमलोगोंका ऐसा कोई काम बाकी नहीं है, जिसे पूर्ण करनेके लिये आपके यहाँ रहनेकी आवश्यकता हो। ब्राह्मणोंके शापके कारण आपका यह कुल भी एक प्रकारसे नष्ट हो ही चुका है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.6.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 748) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/6/26/